“यह मेरा आखिरी चुनाव है…” बाहुबली का बड़ा ऐलान- नितीश के जाने से दुखी

Ajay Gupta
Ajay Gupta

बिहार की राजनीति में एक नाम लंबे समय से दबदबे के साथ गूंजता रहा है Anant Singh। मोकामा की गलियों से लेकर पटना की सत्ता तक उनकी राजनीतिक मौजूदगी हमेशा चर्चा में रही। लेकिन अब उसी बाहुबली नेता ने ऐसा ऐलान कर दिया है जिसने बिहार की सियासी फिजा में हलचल पैदा कर दी है।

उन्होंने साफ कहा है कि मौजूदा कार्यकाल उनका आखिरी होगा। यानी अगला विधानसभा चुनाव वह खुद नहीं लड़ेंगे।

राजनीतिक गलियारों में इसे सिर्फ बयान नहीं बल्कि एक सियासी संकेत माना जा रहा है।

विधानसभा के बाद चुनावी राजनीति से दूरी

दरअसल बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए विधानसभा में मतदान के दौरान जब पत्रकारों ने उनसे उनके राजनीतिक भविष्य के बारे में पूछा, तो उन्होंने बिना घुमाए सीधे जवाब दिया। अनंत सिंह ने कहा कि वह अब सक्रिय चुनावी राजनीति से दूरी बनाना चाहते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर Nitish Kumar विधानसभा की राजनीति में नहीं रहेंगे, तो उनके लिए भी विधायक बने रहने का कोई खास मतलब नहीं होगा।

उनका यह बयान बिहार की राजनीति में कई तरह की अटकलों को जन्म दे रहा है।

परिवार को सौंपेंगे राजनीतिक विरासत

सियासत में अक्सर देखा जाता है कि नेता जब सक्रिय राजनीति से पीछे हटते हैं तो विरासत परिवार को सौंप देते हैं। अनंत सिंह भी अब उसी रास्ते पर चलते दिख रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि अगला विधानसभा चुनाव वह नहीं लड़ेंगे, बल्कि उनके परिवार का कोई सदस्य मैदान में उतरेगा।

संकेत साफ है उनका बड़ा बेटा आगामी चुनाव में उम्मीदवार हो सकता है।

अनंत सिंह ने कहा, “यह मेरा आखिरी शपथ ग्रहण था। अब मेरे बाल-बच्चे चुनाव लड़ेंगे और जनता की सेवा करेंगे।”

जेल से बाहर आने को लेकर भी दावा

बातचीत के दौरान अनंत सिंह ने अपने समर्थकों को एक और संदेश दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें भरोसा है कि जल्द ही वह जेल से बाहर आएंगे और अपने समर्थकों के बीच नजर आएंगे।

उनका दावा है कि करीब एक महीने के भीतर वह जेल से बाहर होंगे

इस बयान ने उनके समर्थकों में उत्साह तो बढ़ाया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों के बीच नई चर्चा भी शुरू कर दी है।

मुख्यमंत्री के सवाल पर चुप्पी

जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि नीतीश कुमार के बाद बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, तो अनंत सिंह ने इस सवाल पर ज्यादा टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि यह फैसला खुद नीतीश कुमार ही करेंगे।

सियासी असर कितना बड़ा होगा?

राजनीतिक विश्लेषक आलोक सिंह का मानना है कि मोकामा में अनंत सिंह की पकड़ काफी मजबूत रही है। ऐसे में अगर वह चुनाव नहीं लड़ते हैं तो यह सिर्फ एक सीट का मामला नहीं होगा, बल्कि स्थानीय सत्ता समीकरण बदल सकते हैं

अब सबकी नजर इस बात पर है कि उनके परिवार से कौन चुनाव मैदान में उतरता है और जनता उसे कितना समर्थन देती है।

बिहार की राजनीति में अक्सर कहा जाता है “नेता राजनीति से रिटायर नहीं होते, बस सीट बदल लेते हैं… या उम्मीदवार बदल देते हैं।

अनंत सिंह के मामले में भी कुछ ऐसा ही लगता है। सियासत से विदाई नहीं…बस अगली पारी परिवार के नाम।

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